ये हैं दुनिया की सबसे खतरनाक सर्जिकल स्ट्राइक

किसी भी देश द्वारा अपने देश के हित में दूसरे देश की सीमा में घुसकर सैन्य कार्रवाई को सर्जिकल स्ट्राइक कहते हैं।सर्जिकल स्ट्राइक जब हवाई रास्ते से हो तो एयर स्ट्राइक भी कहा जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक अक्सर दुशमन देश के अंदर घुसकर उसे सबक सिखाने के लिए की जाती है। सर्जिकल स्ट्राइक हमेशा से सैन्य कार्यवाही व रणनीति का एक अहम हिस्सा रही है। आइये जानते हैं दुनिया में अब तक हुई 10 बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में।
1. बे ऑफ पिग्स इवेशन  1961 :  यह अमेरिका का असफल ऑपरेशन था जिसमे अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने 17 अप्रैल 1961 में सीआईए-एलईडी को क्यूबा पर आक्रमण का आदेश दिया। फिदेल कास्त्रो सरकार को उखाड़ फेंकने के सैन्य मिशन बुरी तरह फेल हुआ था। इस अभियान में 1400 सैनिक भेजे गए थे। 100 से अधिक अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।इसके बारे में अमेरिका को बड़ी फजीयत झेलनी पड़ी थी.
2. मोसाद की ऑपरेशन ब्लैक सेंप्टेंबर पर योजना
साल 1972 में म्यूनिख ओलंपिक खेलों के आयोजन के दौरान ओलंपिक विलेज में हथियारों से लैस आतंकवादी घुस गए। ये फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन से जुड़े आतंकी थे। उन्होंने 11 इसराइली खिलाड़ियों को बंधक बना लिया। इसके बाद उन्होंने जेलों में बंद 234 फलस्तीनियों को रिहा करने की मांग रखी। इसके बाद इसराइली सेना की खुफिया एजेंसी मोसाद टीम के शॉर्प शूटरों ने आतंकियों को चुन चुनकर मारना शुरू कर दिया था। खुद को चारों तरफ से घिरता देख आतंकियों ने निहत्थे खिलाड़ियों पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। एक हेलीकॉप्टर को बम से उड़ा दिया गया। फिर दूसरे हेलीकॉप्टर में बैठे खिलाड़ियों को भी गोलियों से भून दिया गया। कुछ ही मिनटों में एयरबेस पर मौजूद हर आतंकी मारा गया। साथ ही इसराइल के 9 खिलाड़ी भी आतंकियों की गोलियों के शिकार बन गए। फलस्तीनी आतंकवादियों ने इसराइल के 11 खिलाड़ियों को म्यूनिख ओलंपिक में बंधक बनाया और उन्हें मार दिया। इस खौफनाक मिशन को अंजाम देने वाले 8 आतंकी भी मारे गए।
3. इसराइली सेना के ‘रैथ ऑफ गॉड’
इसराइली सेना ने अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद से उन सभी लोगों के कत्ल की योजना बनाई, जिनका वास्ता ऑपरेशन ब्लैक सेंप्टेंबर से था।यह सबसे खतरनाक स्तर पर रची गयी  सर्जिकल स्ट्राइक थी ,इस मिशन को नाम दिया गया ‘रैथ ऑफ गॉड’। म्यूनिख नरसंहार के दो दिन के बाद इसराइली सेना ने सीरिया और लेबनान में मौजूद फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन के 10 ठिकानों पर बमबारी की और करीब 200 आतंकियों और आम नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया।
4. ‘ऑपरेशन एंटेबे’
सन् 1976 में युगांडा में बंधक बने अपने नागरिकों को बचाने के लिए इसराइल ने इस साहसिक ऑपरेशन को अंजाम दिया था। जिसका अंत 4 जुलाई को ही सन् 1976 में हुआ था। 27 जून, 1976 को तेल अवीव से पेरिस के लिए रवाना हुई एक फ्लाइट ने थोड़ी देर एथेंस में रुकने के बाद उड़ान भरी ही थी कि पिस्टल और ग्रेनेड लिए चार यात्रियों ने विमान को अपने कब्जे में लिया। ‘पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन फॉर फिलस्तीन’ के आतंकवादी विमान को पहले लीबिया के बेनगाजी और फिर युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे पर ले गए।
 युगांडा के तत्कालीन तानाशाह ईदी अमीन भी अपहरणकर्ताओं के समर्थन में थे। अपहरणकर्ताओं ने बंधकों की जान लेने की धमकी देते हुए मांग की थी कि इसराइल, कीनिया और तत्कालीन पश्चिमी जर्मनी की जेलों में रह रहे 54 फिलस्तीन कैदियों को रिहा किया जाए। इसराइल ने अपने नागरिकों को बचाने के लिए 4 जुलाई को कुछ फैंटम जेट लड़ाकू विमानों को सेना के सबसे काबिल 200 सैनिकों के साथ रवाना किया। इस ऑपरेशन की योजना इस तरह बनाई गई थी कि युगांडा के सैनिकों को लगे कि इन विमानों में राष्ट्रपति ईदी अमीन विदेश यात्रा से वापस लौट रहे हैं। अमीन उन दिनों मॉरीशस की यात्रा पर थे। इसराइली सैनिकों ने युगांडा के सैनिकों की वर्दी पहनी हुई थी।

इसराइली सैनिकों ने हवाई अड्डे पर खड़े युगांडा के लड़ाकू विमान ध्वस्त किए और सभी सात अपहरणकर्ताओं को मार गिराया। पूरे अभियान में इसराइल का सिर्फ एक सैनिक मारा गया। ये इसराइल के मौजूदा पीएम बेंजामिन के भाई लेफ्टिनेंट कर्नल नेतन्याहू थे, जिन्हें एक गोली लगी थी। वे घायल हो गए थे और इसराइल वापस लौटते हुए विमान में ही उनकी मौत हो गई थी।

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5. ऑपरेशन ईगल क्लॉ ईरान
अमेरिका ने यह ऑपरेशन ‘अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर बंधक बनाए गए’ अपने नागरिकों को छुड़ाने के लिए चलाया था। दरअसल ईरान ने अमेरिका पर उसके घरेलू मामलों में दखल देने का आरोप लगाते हुए उसके दूतावास को बंद कर दिया था। फिर अमेरिका ने रेस्क्यू ऑपरेशन कर बंधक बनाए नागरिकों को छुड़ाने का प्लान बनाया। इस प्लान के तहत अमेरिकी सैनिक 24 अप्रैल 1980 की रात अपने टारगेट की तरफ निकले। अचानक आए रेत के तूफान ने उन्हें कमजोर कर दिया। उन्हें लौटना पड़ा। इस हादसे में करीब आठ अमेरिकी सैनिक मारे गए। फिर वह मिशन कैंसल कर दिया गया और सभी सैनिक वापस बुला लिए गए।
6. सोमालिया में ब्लैक डॉक डॉन
अमेरिका की स्पेशल टास्क फोर्स ने साल 1993 में सोमालिया के मोहम्मद फाराह एदिद को पकड़ने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक किया था। हालांकि ये स्ट्राइक असफल रहा और अमेरिका के दो ब्लैक डॉक डॉन हेलीकॉप्टर मार गिराए गए। इसमें 18 सैनिकों की मौत हो गई थी, वहीं 70 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो गए। इसी बीच मौके का फायदा उठाते हुए फाराह एदिद भाग निकला। इस सर्जिकल स्ट्राइक को नाकामयाब स्ट्राइक के तौर पर देखा जाता है।
7. पाकिस्तान के एबटाबाद में लादेन पर अमेरिका की कार्रवाई
खालिद शेख मोहम्मद अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में हुए हमले का आरोपी था। उसे पकड़ने के लिए अमेरिका की स्पेशल टास्‍क फोर्स ने पाकिस्तान के रावलपिंडी में ऑपरेशन चलाया। सीआईए ने इसमें कामयाबी पाई और खालिद शेख मोहम्मद को गिरफ्तार कर ग्वाटेनामो की खाड़ी में पूछताछ के लिए भेजा।
इसके बाद विश्व के लिए चिंता का सबब बन चुके और अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने वाले अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमेरिका ने सर्जिकल स्ट्राइक किया था। मई 2011 में अमेरिकी सेना की स्पेशल टास्क फोर्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में स्थित एक घर में कार्रवाई करते हुए ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। यह एक प्री प्लान हमला था, जिसे सीआईए ने संचालित किया था।
8. जून, 2015 : म्यांमार ऑपरेशन
4 जून, 2015 को नागा उग्रवादियों ने चंदेल एरिया में भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। इस दौरान हमारे 18 सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना की 70 सैनिकों की एक टीम ने म्यांमार के जंगलों में सर्जिकल ऑपरेशन किया। 40 मिनट चले इस सर्जिकल ऑपरेशन में 38 नागा उग्रवादियों को मौत के घाट उतारा गया था। वहीं 7 नागा उग्रवादी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
9. उरी अटैक के बाद भारत ने की सर्जिकल स्ट्राइक

29 सितंबर, 2016 : उरी में हुए आतकंवादी हमले के बाद 29 सितंबर 2016 की रात सेना ने एलओसी पार करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक किया। इस हमले के दौरान 38 आतंकवादी मारे गए। वहीं आतंवादियों के 7 ठिकाने भी नष्ट कर दिए गए।

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10. पुलवामा हमले के बाद भारत ने की सर्जिकल स्ट्राइक
25-26 फरवरी, 2019 : 14 फरवरी 2019 को जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी द्वारा भारतीय सेना के एक काफिले पर पुलवामा में आत्‍मघाती हमला किया गया। इस हमले में शहीद हुए 40 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की शहादत का बदला भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर लिया। इस हमले में वायुसेना के विमानों ने करीब 350 आतंकियों को ‘दोजख की आग’ में झोंक दिया।
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भारत ने किए सर्जिकल स्ट्राइक-
29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना की ओर से पाकिस्तान की सीमा में घुसकर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक की तरह ही भारतीय सेना की ओर से इस तरह के ऑपरेशन किए जाते रहे हैं। इसी प्रकार बीते 19 वर्षों में कम से कम 9 बार हमारी सेना ने एलओसी के पार जाकर ऑपरेशंस को अंजाम दिया और पाकिस्तानी सेना को सबक सिखाया। आइए, जानते हैं कब-कब हुए हैं ये ऑपरेशंस…
मई 1998 : पाकिस्तान ने खुद भारतीय सेना के इस ऑपरेशन की संयुक्त राष्ट्र से 1998 में शिकायत की। संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक किताब 1998 के पेज 321 पर ये शिकायत दर्ज है। इसके मुताबिक पाकिस्तान ने 4 मई को शिकायत में कहा कि पीओके में एलओसी के 600 मीटर पार बंदाला सेरी में 22 लोगों को मार डाला गया। पाकिस्तान गांव में मौजूद कुछ चश्मदीदों के हवाले से ये भी बताया गया, ‘करीब एक दर्जन शख्स, काले कपड़ों में आधी रात को आए। उन्होंने कुछ पर्चे भी छोड़े जिस पर एक में लिखा था- ‘बदला ब्रिगेड’. वहीं दूसरे पर्चे पर लिखा था- ‘बुरे काम का बुरा नतीजा।’ एक और पर्चे पर लिखा था- एक आंख के बदले 10 आंखें, एक दांत के बदले पूरा जबाड़ा।’ उस वक्त कुछ अमेरिकी अधिकारियों की ओर से माना गया था कि ये कार्रवाई पठानकोट और ढाकीकोट के गावों में 26 भारतीय नागरिकों की हत्या के बदले में की गई थी।

साल 1999 : भारतीय सेना ने 1999 की गर्मियों में कारगिल युद्ध के दौरान जम्मू के पास मुनावर तवी नदी से एलओसी को क्रॉस किया था। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान की एक पूरी चौकी को उड़ा दिया गया। उसी घटना के बाद पाकिस्तान ने बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) का गठन किया था।

जनवरी, 2000 : कारगिल युद्ध के जनवरी 2000 को नीलम नदी के पार नडाला एनक्लेव में एक पोस्ट पर रेड के दौरान 7 पाकिस्तानी सैनिकों को कथित तौर पर पकड़े जाने का दावा किया गया था। ये सातों सैनिक भारतीय सैनिकों की गोलीबारी में घायल हुए थे।

मार्च, 2000 : 12 बिहार बटालियन के कैप्टन गुरजिंदर सिंह इंफैन्ट्री बटालियन कमांडो (घातक) की टीम के साथ एलओसी पार जाकर पाकिस्तानी चौकी पर धावा बोला। ये पाकिस्तानी सेना के पूर्व में किए गए हमले की जवाबी कार्रवाई थी। भारत के इस ऑपरेशन में कैप्टन सूरी शहीद हो गए।

साल 2003 : 2003 में एलओसी पर दोनों देशों में सीजफायर लागू होने के बाद से दूसरे की जमीन पर जाकर होने वाले ऑपरेशन की कम ही जानकारी उपलब्ध है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से एलओसी पर निगरानी वाले संयुक्त राष्ट्र प्रेषक दल (UNMOGIP) को दर्ज शिकायतों से पता चलता है कि क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशंस बदस्तूर जारी रहे।

साल 2008 : 2008 में भी कम से कम दो बार ऐसी घटनाएं हुईं। ये वो साल था जब एलओसी पर टकराव की घटनाएं बढ़ने लगी थीं। पाकिस्तान की शिकायतों के मुताबिक पूंछ के भट्टल सेक्टर में 19 जून 2008 को भारतीय सैनिकों की कार्रवाई में चार पाकिस्तानी जवान मारे गए।

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अगस्त, 2011 : पाकिस्तान ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके एक जेसीओ समेत 4 जवान केल में नीलम नदी घाटी के पास भारतीय सेना की कार्रवाई में मारे गए। ये ऑपरेशन कारनाह में भारतीय जवानों पर हमले में दो भारतीय सैनिकों की हत्या और उनके शवों को क्षतविक्षत किए जाने के बदले में किया गया।

जनवरी, 2013 : जनवरी, 2013 की रात को क्रॉस बार्डर फायरिंग के बाद 19 इंफैन्ट्री डिवीजन कमांडर गुलाब सिंह रावत ने पाकिस्तानी पोस्ट पर हमला करने की इजाजत मांगी। इस पाकिस्तानी पोस्ट से भारतीय सैनिकों को निशाना बनाया जा रहा था। सावन पात्रा को निशाना बनाने के लिए एलओसी पार जाने की औपचारिक अनुमति नहीं थी, लेकिन तनाव में इस तरह की चीजें हो जाती हैं।

4 जून 2015 : 4 जून 2015 को नागा उग्रावादियों ने चंदेल एरिया में भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। इस दौरान हमारे 18 सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना की 70 सैनिकों की एक टीम ने म्यामार के जंगलों में सर्जिकल ऑपरेशन किया। 40 मिनट चले इस सर्जिकल ऑपरेशन में 38 नागा उग्रवादियों को मौत के घाट उतारा गया था। वहीं, 7 नागा उग्रवादी गंभीर रूप से घायल हुए थे।

29 सितंबर 2016 : उड़ी में हुए आतकंवादी हमले के बाद 29 सितंबर 2016 की रात सेना ने एलओसी पार करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक किया। इस हमले के दौरान 38 आतंकवादी मारे गए। वहीं, आतंवादियों के 7 ठिकाने भी नष्ट कर दिए।

25-26 फरवरी 2019 : 14 फरवरी 2019 को जैश ए मोहम्मद के आतंकवादी द्वारा crpf के काफिले पर पुलवामा में हमला किया गया। इस हमले में शहीद हुए 40 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की शहादत का बदला भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर लिया। इस हमले में वायुसेना के विमानों ने करीब 350 पाकिस्तान में शरण लिए बैठे आंतकियों को उड़ा दिया जिसमे जै.म. के करीबन 25 टॉप कमांडर भी शामिल थे तथा इतने ही संख्या में पाक आर्मी के रिटायर्ड सैनिक जो ट्रेनर थे वो भी राख बन गए। पुरे ऑपरेशन में वायुसेना के 12  मिराज 2000 शामिल रहे और महज 21 मिनट में loc के पार 88 किमी तक घुसकर आंतकियों के कैप उड़ाकर भारतीय वायुसेना के फाइटर प्लेन सकुशल लौट आये। इस पुरे ऑपरेशन को उरी के बाद वाली सर्जिकल स्ट्राइक की ही तरह तीनो भारतीय सेनाओं के प्रमुख ,प्रधानमंत्री खुद व NSA डोभाल भी वार रूम से लीड कर रहे थे ,वायुसेना ने इस  हमले में पाकिस्तान की रडार प्रणाली को चकमा देकर इंट्री की और अंतिम 5 मिनट में वापिस लौटते समय जब पाक आर्मी के फाइटर प्लेन 16 FA आये तो उनपर गोलीबारी भी की ,अचानक से हुए इस अप्रत्याशित हमले से पाक सेना को सम्भलने का समय ही नहीं मिला।
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